January 2009
39 posts
एहसानफरामोश और अपराधलिप्त नेताओं के देश से वापसी →
सठिया चुके दिमाग से उलूल-जुलूल संभावनायें तलाशते अंतुले और मौकापरस्त दलबदलू नेता दिग्विजय सिंह सरीखे नेताओं की जमात वाले देश से बुश को पुश करते ओबामा की रट लगाने वाले देश में हमारी सकुशल वापसी हो गयी…
Jan 1st
December 2008
21 posts
दोज़ख की जुबान सी जरूरी है ब्‍लॉगिंग →
चलिए मान लेते हैं कि शीर्षक ज्‍यादा सनसनीखेज है पर अगर आप हंस के संपादक राजेंद्र यादव के विषय में बात कर रहे हों तो खुद ब खुद सनसनीखेजता आ ही जाती है, का करें कंट्रोल ई नी होता :)। …
Dec 30th
ज्‍योतिहीन राह के स्‍पर्शक →
सड़के चिकनी हों, फुटपाथ समतल हों ये किसी शहर के विकसित होने के मापदंडों में से माने जाते हैं। ऐसा कम ही होगा जब आप ऊबड़ खाबड़ फुटपाथ देखें और खुशी महसूस करें या गर्व तथा राहत की अनुभूति हो। साफ समतल…
Dec 29th
बने रहिए सदैव मूर्ख और भुक्खड़ →
वैसे तो ये बात स्टीव जॉब्स ने कही है. स्टे हंगरी स्टे फ़ूलिश. परंतु अगर यही बात आईआईएम अहमदाबाद से निकले 25 चुनिंदा छात्रों की जीवनी से भी सिद्ध होती हो, तो आप क्या करेंगे? यकीनन आप…
Dec 27th
समय से लड़ती घंटाघर की सुइयों के पक्ष में →
किसी बुजुर्ग से बात करें या तीस चालीस साल पुराने किसी शहरी उपन्‍यास को पढ़ें, आपको घंटाझार का जिक्र अवश्‍य मिलेगा।  घंटाघर लगभग हर शहर का महत्‍वपूर्ण निशान (लैंडमार्क) हुआ करता था।  सामान्‍यत यह…
Dec 25th
दीक्षांत : चोगे पहनकर गुलामी खिली है पता चला है →
विश्‍वविद्यालयी दुनिया में जो  बातें मुझे असहज बनाती हैं उनमें से एक है-दीक्षांत समारोह जिन्‍हें अंग्रेजी में कॉन्‍वोकेशन कहा जाता है। यानि जब अब परीक्षा आदि की यातना से गुजर चुके हों तब एक वाहियात…
Dec 24th
साहित्य का अगला नोबल पुरस्कार आपके इस ख़ाकसार को! →
हर साल, साल दर साल जब भी विविध विषयों – क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होती है तो आप भी मेरी तरह बड़े ध्यान से पुरस्कार विजेताओं के बारे में और उनके द्वारा किए गए कार्यों के…
Dec 22nd
दिल्‍ली में आम खपत की कला- 48° C →
महानगरों में कला दिन व दिन उच्‍चभ्रू (बोले तो हाईब्रो) होती जा रही है। ऐसे में दिल्‍ली में चल रहा कला उत्‍सव 48 °C एक सुकूनदायी अनुभव है। देश विदेश के नामी गिरामी कलाकारों ने अपनी कलाकृतियॉं…
Dec 22nd
फ़ौजियों के साथ एक दिन →
हफ़्ते भर नैनीताल में कक्षा रगड़ाई के बाद इतवार को रानीखेत जाने का कार्यक्रम था। रानीखेत में एक फ़ौजी कमान को देखने, मिलने-जुलने और समझने-बूझने का कार्यक्रम था। …
Dec 19th
कस्सम से इससे कम न हो पायेगा →
और मजाक-मजाक में तीन-चार दिन गुजर गये। जैसे-जैसे समय गुजरा लोगों ने भुनभुनाना च उलाहना शुरू कर दिया। इत्ती चढ़ाई करके क्या हम खाली पढ़ाई करने आये हैं? क्या नैनीताल आकर भी बिना इसके दर्शन के वापस चले…
Dec 18th
मुस्कराते हुये लोग कित्ते अच्छे लगने लगते हैं →
ई किस्सा-ए-नैनीताल बबाले जान बना हुआ है। रहा भी न जाये लिखा भी न जाये। सब समय की कारस्तानी है। छुपा-छुपौवल खेलता है। पकड़ में आता ही नहीं। जब लगता है पास है , पकड़ लेंगे तो फ़िर ढपली मारकर निकल जाता…
Dec 16th
ट्वेंटी ईयर्स ईज़ ए हैप्पी, लांग लांग टाइम,... →
सवाल ये है कि बीस साल में क्या हो सकता है और क्या नहीं. एक सरकारी नौकर को बीस साल में फायर किया जा सकता है, यदि वो कामचोर निकला तो. बीस साल! इसका अर्थ ये है कि आप उन्नीस साल तक तो आराम…
Dec 15th
हिन्दी वर्तनी जांच शूटआउट : क्रोम, फ़ायरफ़ॉक्स और... →
हिन्दी स्पेल चेकर अब काल्पनिक चीज नहीं रह गई है. अब आप इसे बहु-प्लेटफ़ॉर्मों और बहु-उत्पादों में प्राप्त कर सकते हैं. हिन्दी राइटर, एमएस वर्ड हिन्दी तथा गूगल क्रोम में अंतर्निर्मित हिन्दी…
Dec 13th
बिस्तर ,पुलिया, चाय की दुकान और कनस्तर में गरम... →
आदमी जो काम कभी नहीं करता वह घर से बाहर निकल कर करने लगता है। कम से कम उसके बारे में मन तो बनाता है। हमारे साथ के तीन दोस्तों ने मन बनाया कि सुबह-सबेरे उठकर आसपास टहलने का काम किया जाये। आसपास के…
Dec 13th
नैनीताल, चाय तुड़ाई और कान से सटा मोबाइल →
सुबह-सुबह छह बजे चाय वाला कमरे के बाहर चाय रख गया और हमें जगा गया! कमरे में रात भर हीटर चलता रहा। रजाई , कंबल के गठबंधन में चल रही शरीर-सरकार बिस्तर से बाहर निकलने का मन नहीं बना पा रही थी। लेकिन…
Dec 12th
उपराष्‍ट्रपति केवल खेद व्‍यक्त करते हैं आजकल →
इधर उधर हांडते हुए अपने उपराष्‍ट्रपति साहिब के अंतर्जालीय घर पर जा पहुँचे।  सोचा देखें कि वे आजकल क्‍या कर रहे हैं। बेहद बिजी हैं…अब उनकी हालिया प्रेस रिलीज ही देखिए, पहले पेज पर 5 प्रेस रिलीज…
Dec 11th
कानपुर से नैनीताल →
पिछली महीने एक ट्रेनिंग के सिलसिले में नैनीताल जाना हुआ। दस दिन का हिसाब-किताब था। जाड़े के मौसम में हिल स्टेशन जाना ऐसा ही था जैसे चांद कहता है अपनी अम्मा से- आसमान का सफ़र और यह मौसम जाड़े का!…
Dec 9th
लीजिए पेश है महिलाओं, कुरमी, यादवों, मुसलिमों,... →
ब्राउज़रों, कम्प्यूटरों में भी जातिवाद? कम्प्यूटिंग की दुनिया को भी जातिवाद अपनी गिरफ़्त में लेने को पूरी तरह तत्पर प्रतीत दीखता है. शुरूआत धमाकेदार हो चुकी है. जातिवाद से अब ब्राउज़र भी…
Dec 9th
चिठेरों के लिए मंदी की मार से बचने के ठोस #8 तरीके... →
मंदी की मार ने होंडा को भी नहीं छोड़ा. उसके बगैर टीवी पर फ़ॉर्मूला #1 रेसिंग देखने का मजा ही क्या रहेगा. नतीजतन, फ़ॉर्मूला #1 रेसिंग की और भी वाट लगने वाली है. वहाँ और भी मंदी छाने वाली…
Dec 8th
नैनीताल से लौटकर →
चार दिन से नैनीताल में आ के पड़े हैं। पढ़ रहे हैं। कित्ता तो फ़न्नी बात है न कि नैनीताल आकर पढ़ाई कर रहे हैं। लोग-बाग इहां आता है घूमने-फ़िरने और हम पढ़ाई कर रहे हैं। है न अजब- गजब बात। लेकिन…
Dec 5th
#13 ख़ास जगहें जहाँ कोई कुत्ता भी नहीं जाता... →
बहुत कुत्ता फ़जीती हो गई. अब ये जुदा बात है कि नेताओं की हुई है या कुत्तों की. फिर भी, जब भी किसी नेता की तुलना किसी कुत्ते से होगी तो यकीनन वहाँ कुत्ते की ही फजीहत होगी. इस बीच, एक…
Dec 4th